बीएपीएस वेतन चोरी और तस्करी मामला
इस मामले के बारे में
जिन श्रमिकों ने न्यू जर्सी, कैलिफोर्निया, इलिनोइस, टेक्सास और जॉर्जिया में बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) के मंदिरों के निर्माण के लिए पत्थर का काम और निर्माण कार्य किया, उन्होंने 2021 में बीएपीएस से संबंधित संस्थाओं पर मुकदमा दायर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने अक्सर खतरनाक काम प्रतिदिन 12.5 घंटे तक, सप्ताह के सातों दिन, साल भर में कुछ ही दिनों की छुट्टी के साथ, लगभग 1.20 डॉलर प्रति घंटे की दर से किया। उनका आरोप है कि बीएपीएस ने तस्करी पीड़ित संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन करते हुए जबरन श्रम कराया — उनके पासपोर्ट छीनकर, दूसरों से संवाद करने पर रोक लगाकर, उन्हें कार्यस्थल छोड़ने से मना करके, और उनके अधिकांश वेतन को विदेशी बैंक खातों में भेजकर गंभीर नुकसान की धमकियों के माध्यम से उन्हें काम करने पर मजबूर किया, इसलिए अनके पास वहाँ से जाने का कोई सार्थक रास्ता नहीं बचा था। इससे श्रमिकों को गंभीर आर्थिक नुकसान, मानसिक पीड़ा और अन्य क्षति हुई। वादियों का यह भी आरोप है कि अत्यंत कम प्रति घंटा वेतन ने उचित श्रम मानक अधिनियम (एफएलएसए) और संबंधित राज्य वेतन कानूनों का उल्लंघन किया।
यह मामला प्रतिवादियों के अनुरोध पर तब रोक दिया गया था जब अमेरिकी न्याय विभाग प्रतिवादियों के खिलाफ तस्करी की जांच कर रहा था। जांच समाप्त हो गई है और यह मामला आगे बढ़ना फिर से शुरू हो गया है।
रैडफोर्ड स्कॉट एलएलपी, काकालेक लॉ पीएलएलसी, और काट्ज़ बैंक्स कुमिन एलएलपी वादियों का प्रतिनिधित्व करते हैं और निम्नलिखित वर्गों का प्रतिनिधित्व करने का प्रस्ताव रखा है:
- वे श्रमिक जिन्होंने 2011 से अब तक आर-1 वीज़ा पर रॉबिन्सविले, न्यू जर्सी में बीएपीएस मंदिरों पर काम किया;
- वे श्रमिक जिन्होंने 2003 से अब तक आर-1 वीज़ा पर अटलांटा, जॉर्जिया में बीएपीएस मंदिरों पर काम किया;
- वे श्रमिक जिन्होंने 2002 से अब तक आर-1 वीज़ा पर ह्यूस्टन, टेक्सास में बीएपीएस मंदिरों पर काम किया;
- वे श्रमिक जिन्होंने 2002 से अब तक आर-1 वीज़ा पर शिकागो, इलिनोइस में बीएपीएस मंदिरों पर काम किया;
- और वे श्रमिक जिन्होंने 2005 से अब तक आर-1 वीज़ा पर लॉस एंजिल्स में बीएपीएस मंदिरों पर काम किया।
वादी न्यायालय से इस मामले को एक वर्ग और सामूहिक कार्रवाई के रूप में आगे बढ़ाने की अनुमति माँगते हैं।
मामले की समयरेखा
11 मई, 2021
वादियों ने न्यू जर्सी के संयुक्त राज्य जिला न्यायालय में अपनी शिकायत दायर की।
शिकायत पढ़ें
3 फरवरी, 2022
वादियों ने अपनी दूसरी संशोधित शिकायत दायर की।
संशोधित शिकायत पढ़ें
08 दिसंबर, 2025:
बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) प्रतिवादियों ने दूसरी संशोधित शिकायत को खारिज करने के लिए एक प्रस्ताव दायर किया।
प्रस्ताव पढ़ें
09 फरवरी, 2026:
वादियों ने बीएपीएस प्रतिवादियों के दूसरी संशोधित शिकायत को खारिज करने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए एक संक्षिप्त दायर किया।
संक्षिप्त और सहायक दस्तावेज़ पढ़ें
17 फरवरी, 2026
वादी पक्ष ने प्रतिवादियों को वादी पक्ष या अन्य वर्ग के सदस्यों के खिलाफ प्रतिशोध करने से रोकने के लिए एक अस्थायी निषेधाज्ञा के लिए याचिका दायर की।
25 फरवरी, 2026
वादी पक्ष और प्रतिवादी पक्ष ने निषेधाज्ञा राहत के लिए सहमति व्यक्त की जो वादी पक्ष और अन्य वर्ग के सदस्यों को ऐसे प्रतिशोध से बचाती है; उस सहमति को यू.एस. डिस्ट्रिक्ट जज जॉर्जेट कास्टनर द्वारा आदेशित किया गया था।
संक्षिप्त विवरण पढ़ें
सो-ऑर्डर्ड स्टिपुलेशन पढ़ें
मार्च 09, 2026:
बीएपीएस प्रतिवादियों ने अपनी खारिज करने की याचिका के और समर्थन में एक प्रत्युत्तर दायर किया।
प्रत्युत्तर पढ़ें
23 मार्च, 2026:
न्यायालय ने वादीगण के उस प्रस्ताव को स्वीकार किया जिसमें भारत स्थित प्रतिवादियों, BAPS इंडिया और हर्षद चावड़ा को, ईमेल, टेक्स्ट मैसेज और सोशल मीडिया संदेश के माध्यम से सम्मन भेजने की अनुमति मांगी गई थी। 22 अप्रैल को वादीगण ने न्यायालय को सूचित किया कि उन्होंने इन प्रतिवादियों को सम्मन भेज दिया है।
17 जून, 2026:
BAPS इंडिया और हर्षद चावड़ा — दोनों ने वादीगण की दूसरी संशोधित शिकायत को अपने विरुद्ध खारिज करने का प्रस्ताव दायर किया।
BAPS इंडिया का प्रस्ताव पढ़ें हर्षद चावड़ा का प्रस्ताव पढ़ें
29 जून, 2026:
न्यायालय ने एक आदेश जारी किया, जिसमें BAPS प्रतिवादियों के मूल खारिज-प्रस्ताव की सुनवाई की तारीख बदल दी गई, ताकि BAPS प्रतिवादियों और भारत स्थित प्रतिवादियों — दोनों के प्रस्तावों पर एक साथ निर्णय लिया जा सके।
3 अगस्त, 2026:
वादीगण ने भारत स्थित प्रतिवादियों के खारिज-प्रस्तावों के विरुद्ध अपने जवाब दायर किए।
BAPS इंडिया के प्रस्ताव के विरुद्ध वादीगण का जवाब पढ़ें हर्षद चावड़ा के प्रस्ताव के विरुद्ध वादीगण का जवाब पढ़ें
5 अगस्त, 2026:
न्यायालय ने पक्षों के साथ एक घंटे की सुनवाई की, जिसमें यह विचार किया गया कि क्या खारिज-प्रस्ताव लंबित रहने के दौरान भी सबूत इकट्ठा करने और जानकारी के आदान-प्रदान की प्रक्रिया (डिस्कवरी) — पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से — शुरू की जा सकती है। वादीगण के वकील उपस्थित हुए और उन्होंने तर्क दिया कि यह प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए।
नोट: “डिस्कवरी” अमेरिकी कानूनी प्रक्रिया का एक चरण है, जिसमें दोनों पक्ष मुकदमे से पहले एक–दूसरे को सबूत और जानकारी देते हैं।